नालंदा की एक झलक

नालंदा संग्रहालय वर्ष 1917 में स्थापित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वाधिक ख्यातिलब्ध संग्रहालयों में से एक है। इस संग्रहालयों में पुरातात्विक उत्खनन द्वारा अनावृत किये गए नालंदा महाविहार से प्राप्त पुरावस्तुओं को संजोया गया है । नालंदा पुरास्थल को विश्व का प्राचीनतम विश्वविद्यालय होने का गौरव प्राप्त है जो गुप्त, मौखरी एवं पालवंश के शासकों से अनवरत प्राप्त होने वाले राजकीय प्रश्रय के परिणाम स्वरुप पांचवी से बारहवीं शती ई. के मध्य उत्कर्ष के शिखर पर था। राजगृह स्थित विभिन्न पुरास्थलों की खुदाई से प्राप्त सामग्री तथा नालंदा के निकटवर्ती ग्रामों से एकत्र किये कुछ पुरावशेष भी यहाँ बाद में संग्रहीत किये गए। मुख्य हाल के अतिरिक्त अन्य चार दीर्घाओं में शो केस तथा पीठिकओ की सहायता से लगभग पुरावस्तुओं को अवलोकनार्थ प्रदर्शित किता गया है जबकि तेरह हजार से अधिक वस्तुएं संग्रह-कोष में सुरक्षित हैं। संग्रहालय के प्रदर्शो में पाषाण मूर्ति-शिल्प के अतिरिक्त कांस्य शिल्प, गच शिल्प (स्टको), पकी मिट्टी की वस्तुएँ (टेराकोटा), अभिलेख, लौह उपकरण, हाथी दाँत व अस्थि निर्मित वस्तुएँ तथा प्राचीन मृदभांड इत्यादि अनेकों पुरावशेष सम्मिलित हैं।

नालंदा संग्रहालय की दीवार पे बौद्ध, जैन व हिन्दू धर्म के देवी-देवताओ की पाषाण प्रतिमाएं प्रदर्शित की गई हैं। बौद्ध प्रतिमाओं में खसर्पण अवलोकितेश्वर, शिव को पददलित करते तांत्रिक देवता हेरुक, गणेश का दमन करतीं देवी अपराजिता, छह शीश वाले यमांतक, सात शूकरों द्वारा चलित रथ पर सवार देवी मारिची तथा बुद्ध के जीवन से जुडी आठ प्रमुख घटनाओं का चित्रण करता फलक इत्यादि प्रमुख हैं जबकि शिव-पार्वती, एक ओर कुबेर व दूसरी ओर शिव-पार्वती को दर्शाता हुआ उभयमुखी फलक, विष्णु, लक्ष्मी, एवं रेवन्त आदि की प्रतिमाएं हिन्दू धर्म का प्रतिनिधित्व करतीं हैं। पार्श्वनाथ एवं ऋषभनाथ जैन मूर्तियों के उदहारण हैं जिन्हे क्रमशः ध्यान मुद्रा में बैठे हुए व कायोत्सर्ग में खड़े हर दर्शाया गया है।

'श्री नालंदा महविहारीयार्य भिक्षु संघस्य' लेख युक्त टेराकोटा सीलिंग, स्वस्तिक अलंकरण से युक्त ईंट, लोहे का विशेष ताला, प्रतीत्य समुत्पाद सूत्र का अंश अभिलिखित मृण्मय पट्ट, जले हुए चावल का अंश, स्टको निर्मित बुद्ध व बोधिसत्व के शीश तथा सर्प पूजन में प्रयोग होने वाला राजगृह से प्राप्त एक बहुमुखी कलश इत्यादि इसके मुख्य आकर्षण हैं।

नालंदा संग्रहालय के उत्खनन से कांस्य शिल्प के उदहारण भी प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुए हैं। इनमें बुद्ध की अभय, वरद एवं भूमि स्पर्श मुद्रा में मूर्तियां, प्रज्ञापारमिता, तारा, लोकनाथ तथा अन्य देवताओं की मूर्तियां जहाँ बौद्ध धर्म से सम्बंधित हैं वहीं विष्णु, गणेश, सूर्य, कामदेव इत्यादि हिन्दू मूर्तियों के प्रमुख उदहारण हैं। इनके अतिरिक्त तीन प्रस्तर शिलालेख भी विशेष उल्लेखनीय है जो क्रमशः पूर्णवर्मन, यशोवर्मदेव एवं विपुल श्री मित्र के समय में नालंदा की कीर्ति का वर्णन करते हैं।

"नालंदा संग्रहालय का अवलोकन अपने गौरवशाली अतीत की झलक दिखलाने वाली एक सार्थक यात्रा के समान है। हम आवाहन करते है की आप अपने व्यस्त समय से समय निकाल कर अपने परिवार व इष्ट मित्रों सहित नालंदा संग्रहालय तथा उत्खनित स्थल का भर्मण करें। हमारा दावा है की आप ज्ञान के सागर में स्नान कर अपने गौरवशाली अतीत की ताज़गी अनुभव करें।"



Image

नालंदा संग्रहालय का मुख्य द्वार

नालंदा के सुन्दर दृश्य यहाँ से शुरू होते हैं। नालंदा के सुन्दर दृश्यों को देखने के लिए द्वार पर लोगों को 5 रुपये की टिकिट लेने की और बच्चों के लिए नि: शुल्क प्रवेश की सुविधा है।


पुरातत्व संग्रहालय नालंदा
Image

नालंदा संग्रहालय का परिसर

नालंदा संग्रहालय का परिसर भी नालंदा के मठों के समान ही खूबसूरत है। परिसर मे एक सुन्दर बगीचा है जो विभिन्न प्रकार के पेड़ और पौधों से सुसज्जित है।


पुरातत्व संग्रहालय नालंदा

नालंदा संग्रहालय का भवन

Image

Image

Image

1200 ई. में बख्तियार खिलजी के मामलुक वंश के की एक सेना द्वारा नालंदा में तोड़फोड़ की गयी और नष्ट कर दिया गया था। जबकि कुछ सूत्रों का कहना है कि ये तब हुआ जब महाविहार कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से जारी किया गया। यह अंत में छोड़ दिया और 19 वीं सदी तक भुला दिए गया था। 19 वीं सदी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा आयोजित प्रारंभिक खुदाई में साइट का सर्वेक्षण किया गया था। व्यवस्थित खुदाई के 1915 में शुरू किया गया जिसमे ग्यारह मठों और ईंट के मंदिरों का पता लगा जो12 हेक्टेयर भूमि के आधार क्षेत्र में बड़े करीने व्यवस्थित है। एक निधि की मूर्तियां, सिक्के, जवानों, और शिलालेखों भी खंडहर में खोज की गई है। जिनमें से कई नालंदा पुरातत्व संग्रहालय में प्रदर्शन हेतु रखे गए है जो की कुछ दुरी पर स्तिथ है। नालंदा अब एक उल्लेखनीय पर्यटन स्थल है और बौद्ध पर्यटन का एक हिस्सा है।


पुरातत्व संग्रहालय नालंदा